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प्रसूता की मौत ने खड़े किए गंभीर सवाल, पिथौरागढ़ महिला अस्पताल में प्रसव के दौरान 26 वर्षीय महिला का निधन

उत्तराखण्ड | स्वास्थ्य

Loklens News | पिथौरागढ़

पिथौरागढ़ के जिला महिला अस्पताल में प्रसव के दौरान 26 वर्षीय कमला बिष्ट की मौत हो जाने से स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रसव प्रबंधन को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यह दर्दनाक घटना उस समय सामने आई, जब प्रसव के बाद महिला की हालत अचानक बिगड़ गई और तमाम प्रयासों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका।
सिजेरियन से इनकार, नॉर्मल डिलीवरी पर बनी सहमति
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार कमला बिष्ट पहले से एक तीन वर्षीय बच्ची की मां थीं, जिसका जन्म सिजेरियन ऑपरेशन के माध्यम से हुआ था। चिकित्सकीय दृष्टि से ऐसी स्थिति में दूसरी डिलीवरी भी सिजेरियन से कराए जाने की सलाह दी जाती है। अस्पताल का कहना है कि चिकित्सकों ने ऑपरेशन की आवश्यकता को लेकर महिला और परिजनों को समझाया, लेकिन परिजनों ने सिजेरियन से इनकार करते हुए नॉर्मल डिलीवरी की इच्छा जताई।
डिलीवरी के बाद बिगड़ी हालत
नॉर्मल डिलीवरी सफलतापूर्वक हुई और महिला ने एक पुत्र को जन्म दिया, लेकिन इसके तुरंत बाद महिला को अत्यधिक रक्तस्राव होने लगा। डॉक्टरों ने रक्त चढ़ाने सहित सभी आवश्यक चिकित्सकीय प्रयास किए, लेकिन स्थिति पर काबू नहीं पाया जा सका और महिला ने दम तोड़ दिया।
नवजात की हालत नाजुक, मेडिकल कॉलेज रेफर
डिलीवरी के दौरान नवजात को सांस लेने में दिक्कत हुई, जिसके चलते उसकी हालत गंभीर हो गई। नवजात को तत्काल अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है, जहां उसका इलाज जारी है। परिजन बच्चे को लेकर अल्मोड़ा रवाना हुए थे, इसी दौरान मां की मृत्यु की सूचना सामने आई।
तीन साल की बच्ची के सिर से उठा मां का साया
इस घटना ने परिवार को गहरे शोक में डुबो दिया है। तीन साल की मासूम बच्ची, जो मां के लौटने का इंतजार कर रही थी, अब हमेशा के लिए मां के स्नेह से वंचित हो गई है। यह घटना स्थानीय लोगों के बीच भी गहरी संवेदना और चिंता का विषय बनी हुई है।
डॉक्टर का पक्ष
जिला अस्पताल पिथौरागढ़ की पीएमएस डॉ. भागीरथी गर्ज्याल ने बताया कि महिला और उसके परिजनों ने सिजेरियन ऑपरेशन कराने से स्पष्ट रूप से इनकार किया था। सभी संभावित जोखिमों की जानकारी दी गई थी। नॉर्मल डिलीवरी के बाद अत्यधिक रक्तस्राव हुआ और महिला को बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किए गए, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। चिकित्सकों के अनुसार सिजेरियन होने की स्थिति में परिणाम भिन्न हो सकता था।

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