वेनेज़ुएला का राजनीतिक इतिहास और अमेरिका: सत्ता, तेल और टकराव की लंबी कहानी
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अंतरराष्ट्रीय डेस्क | LokLens News
दक्षिण अमेरिका का देश वेनेज़ुएला लंबे समय से राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक संकट और अंतरराष्ट्रीय तनाव का केंद्र रहा है। वेनेज़ुएला के राजनीतिक इतिहास को उसके विशाल तेल संसाधनों और संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ उसके संबंधों से अलग करके नहीं समझा जा सकता। बीसवीं सदी के मध्य से ही तेल आधारित अर्थव्यवस्था और बाहरी शक्तियों का प्रभाव देश की राजनीति को दिशा देता रहा है।
1958 में सैन्य तानाशाही के पतन के बाद वेनेज़ुएला में लोकतांत्रिक शासन की शुरुआत हुई। इसके बाद कई दशकों तक सत्ता मुख्य रूप से दो राजनीतिक दलों के बीच घूमती रही। इस दौर में अमेरिका के साथ संबंध सामान्य और सहयोगात्मक बने रहे, क्योंकि वेनेज़ुएला अमेरिका के लिए कच्चे तेल का एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता था। तेल निर्यात से मिलने वाली आय ने लंबे समय तक देश की अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाए रखा।
1990 के दशक के अंत तक आर्थिक असमानता, भ्रष्टाचार और जन असंतोष गहराता चला गया, जिससे पारंपरिक राजनीतिक व्यवस्था की विश्वसनीयता कमजोर पड़ने लगी। इसी पृष्ठभूमि में 1999 में ह्यूगो चावेज़ सत्ता में आए। उन्होंने “बोलिवेरियन क्रांति” के नाम पर समाजवादी नीतियाँ अपनाईं, तेल उद्योग पर राज्य का नियंत्रण बढ़ाया और अमेरिका विरोधी रुख को खुलकर सामने रखा। यहीं से वेनेज़ुएला और अमेरिका के संबंधों में लगातार तनाव बढ़ने लगा।
2002 में चावेज़ के खिलाफ हुए असफल तख्तापलट में अमेरिका की कथित भूमिका ने दोनों देशों के बीच अविश्वास को और गहरा कर दिया। इसके बाद वेनेज़ुएला ने अमेरिका से दूरी बढ़ाते हुए रूस, चीन और अन्य देशों के साथ अपने संबंध मजबूत किए, जिससे वैश्विक राजनीति में उसकी स्थिति और जटिल होती चली गई।
ह्यूगो चावेज़ के बाद 2013 में निकोलस मादुरो राष्ट्रपति बने। इस समय तक तेल की कीमतों में गिरावट, कुप्रबंधन और नीतिगत विफलताओं के कारण वेनेज़ुएला गहरे आर्थिक संकट में फँस चुका था। अमेरिका ने मादुरो सरकार पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने और मानवाधिकार उल्लंघनों के आरोप लगाते हुए कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए। इन प्रतिबंधों का सबसे गहरा असर आम नागरिकों पर पड़ा, जिससे महंगाई, बेरोज़गारी और आवश्यक वस्तुओं की कमी बढ़ी।
2019 में विपक्षी नेता जुआन गुएदो ने खुद को अंतरिम राष्ट्रपति घोषित किया, जिसे अमेरिका सहित कई पश्चिमी देशों का समर्थन मिला। हालांकि, सेना और सरकारी संस्थानों का समर्थन मादुरो के साथ बने रहने के कारण सत्ता परिवर्तन नहीं हो सका। यह घटनाक्रम वेनेज़ुएला के आंतरिक राजनीतिक संघर्ष और अमेरिका की भूमिका को लेकर अंतरराष्ट्रीय बहस का बड़ा उदाहरण बन गया।
