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भारत–ईरान व्यापार पर संकट का असर, बासमती चावल निर्यातकों के भुगतान अटके

LokLens News | अर्थव्यवस्था

भारत और ईरान के बीच व्यापारिक संबंधों पर ईरान में जारी संकट का सीधा असर देखने को मिल रहा है। ताज़ा रिपोर्टों के अनुसार भारतीय बासमती चावल निर्यातकों के हजारों करोड़ रुपये के भुगतान लंबे समय से अटके हुए हैं, जिससे निर्यात क्षेत्र में गंभीर चिंता पैदा हो गई है।

निर्यातकों का कहना है कि ईरान में आर्थिक अस्थिरता, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और बैंकिंग चैनलों में आई बाधाओं के कारण भुगतान प्रक्रिया लगभग ठप हो गई है। भारत से ईरान को बासमती चावल का निर्यात वर्षों से एक प्रमुख व्यापारिक गतिविधि रहा है, लेकिन मौजूदा हालात में निर्यातकों को भारी वित्तीय दबाव का सामना करना पड़ रहा है।

उद्योग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, कई छोटे और मध्यम स्तर के निर्यातक वर्किंग कैपिटल संकट से जूझ रहे हैं। भुगतान अटकने से न केवल नए ऑर्डर प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि किसानों से खरीद और घरेलू आपूर्ति श्रृंखला पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

निर्यातक संगठनों ने भारत सरकार से कूटनीतिक स्तर पर हस्तक्षेप करने की मांग की है। उनकी मांग है कि दोनों देशों के बीच वैकल्पिक भुगतान व्यवस्था, विशेष वित्तीय चैनल या सरकारी गारंटी जैसे उपायों पर विचार किया जाए, ताकि लंबित भुगतान की समस्या का समाधान हो सके।

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो इसका असर भारत के कृषि निर्यात, विदेशी मुद्रा आय और किसानों की आय पर भी पड़ सकता है। सरकार और रिज़र्व बैंक स्तर पर लिए जाने वाले फैसले इस संकट से निपटने में निर्णायक साबित हो सकते हैं।

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