रानीखेत में आवारा गौवंश की समस्या को लेकर महिलाओं का प्रदर्शन, गौशाला निर्माण की उठाई मांग
रानीखेत | LokLens News Desk
रानीखेत के जरूरी बाजार क्षेत्र की महिलाओं एवं मातृशक्ति ने क्षेत्र में बढ़ती पालतू एवं आवारा गौवंश की समस्या को लेकर संयुक्त मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपते हुए स्थायी समाधान की मांग की है। महिलाओं का कहना है कि बाजार, सड़कों और आवासीय क्षेत्रों में बड़ी संख्या में घूम रहे गौवंश के कारण आम नागरिकों को रोजमर्रा की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
ज्ञापन के माध्यम से महिलाओं ने बताया कि आवारा गौवंश के कारण कई बार सड़क दुर्घटनाओं की आशंका उत्पन्न हो जाती है। इसके अलावा बाजार क्षेत्र में व्यापारियों, स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और राहगीरों को भी असुविधा का सामना करना पड़ता है। उनका कहना है कि समस्या लगातार बढ़ती जा रही है और अब इसके स्थायी समाधान की आवश्यकता है।
महिलाओं ने यह भी कहा कि एक ओर जहां आम जनता इस समस्या से प्रभावित हो रही है, वहीं दूसरी ओर गौवंश भी भूख, प्यास और असुरक्षित परिस्थितियों में सड़कों पर भटकने को मजबूर हैं। क्षेत्र में गौवंश के संरक्षण और देखभाल के लिए उचित व्यवस्था के अभाव में स्थिति गंभीर होती जा रही है।
मातृशक्ति ने संयुक्त मजिस्ट्रेट को सौंपे ज्ञापन में क्षेत्र में शीघ्र गौशाला निर्माण की मांग उठाई। उनका कहना है कि यदि गौशाला का निर्माण किया जाता है तो गौवंश को सुरक्षित आश्रय मिलेगा और साथ ही बाजारों एवं सड़कों पर उत्पन्न हो रही अव्यवस्था से भी राहत मिलेगी।
संयुक्त मजिस्ट्रेट ने महिलाओं की समस्याओं को सुनते हुए संबंधित विभागों के माध्यम से आवश्यक कार्यवाही कर जल्द से जल्द समस्या के समाधान का प्रयास करने का आश्वासन दिया।
इस दौरान हेमा पाण्डे, पुष्पा पाण्डे, ममता पाण्डेय, शेखर चंद्र, कुलदीप कुमार सहित क्षेत्र के अन्य नागरिक भी मौजूद रहे।
आवारा गौवंश की समस्या का सबसे अधिक प्रभाव स्थानीय नागरिकों, व्यापारियों और सड़क पर आने-जाने वाले लोगों पर पड़ता है। दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ने के साथ-साथ बाजारों की व्यवस्था भी प्रभावित होती है। वहीं दूसरी ओर उचित देखभाल के अभाव में गौवंश स्वयं भी कठिन परिस्थितियों में जीवन व्यतीत करने को मजबूर हो जाता है।
उत्तराखंड सहित देश के कई राज्यों में आवारा पशुओं की समस्या एक गंभीर सामाजिक और प्रशासनिक चुनौती बन चुकी है। कृषि कार्यों पर पड़ने वाले प्रभाव से लेकर शहरी क्षेत्रों में यातायात बाधित होने तक, इसके अनेक आयाम सामने आते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल अस्थायी उपायों से इस समस्या का समाधान संभव नहीं है। गौशालाओं का निर्माण, पशुओं का पंजीकरण, सामुदायिक सहभागिता और स्थानीय निकायों की सक्रिय भूमिका जैसे दीर्घकालिक कदम आवश्यक हैं। रानीखेत में महिलाओं द्वारा उठाई गई यह मांग केवल जनसुविधा का विषय नहीं, बल्कि पशु संरक्षण और मानवीय संवेदनाओं से जुड़ा मुद्दा भी है।
यदि प्रशासन और समाज मिलकर इस दिशा में ठोस प्रयास करें, तो एक ओर गौवंश को सुरक्षित आश्रय मिल सकता है और दूसरी ओर आम नागरिकों को भी राहत प्राप्त हो सकती है।
[कैंची धाम मेले से पहले बड़ी राहत, बेली ब्रिज लगभग तैयार।
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