कौमी एकता का प्रतीक बना 52वां रानीखेत उर्स मुबारक, मुल्क की सलामती के लिए उठे हजारों हाथ
रानीखेत | LokLens News Desk
मोहब्बत, भाईचारे और इंसानियत का पैगाम देने वाला 52वां रानीखेत उर्स मुबारक चादरपोशी के साथ श्रद्धा एवं आस्था के वातावरण में प्रारंभ हो गया। दरगाह परिसर में अकीदतमंदों की भारी भीड़ उमड़ी, जहां हर जुबान पर देश की खुशहाली, अमन, तरक्की और इंसानियत की दुआ थी।
उर्स के पवित्र अवसर पर हिंदुस्तान की सलामती, सीमाओं पर तैनात वीर सैनिकों की सुरक्षा तथा देश में आपसी प्रेम, सद्भाव और भाईचारे के लिए विशेष दुआएं मांगी गईं। श्रद्धालुओं ने रानीखेत सहित पूरे देश की शांति, उन्नति और समृद्धि की कामना करते हुए हाथ उठाकर दुआ की।
इस अवसर पर पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं CWC सदस्य करन माहरा ने रानीखेत नगर की ओर से दरगाह पर चादर चढ़ाकर प्रदेश और देश की खुशहाली के लिए प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में आपसी सौहार्द, प्रेम और एकता को मजबूत करने का कार्य करते हैं।
दरगाह के ख़ादिम मो. मोहसिन ने उर्स में पधारे सभी श्रद्धालुओं, मेहमानों और अकीदतमंदों का गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने कहा कि उर्स केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह इंसानियत, प्रेम और सामाजिक समरसता का उत्सव है, जहां सभी धर्मों और समुदायों के लोग एक साथ मिलकर देश और समाज की बेहतरी की दुआ करते हैं।
उर्स के दौरान जम्मू-कश्मीर के राजौरी क्षेत्र में मातृभूमि की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले अल्मोड़ा निवासी वीर शहीद लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी को भी श्रद्धापूर्वक याद किया गया। उनकी आत्मा की शांति, शोकाकुल परिवार को शक्ति और माता-पिता को सब्र प्रदान करने के लिए विशेष दुआ की गई। उपस्थित श्रद्धालुओं ने शहीद के बलिदान को नमन करते हुए देश की सुरक्षा में तैनात सभी जवानों की सलामती की कामना की।
आयोजन समिति की ओर से सभी श्रद्धालुओं के लिए आम लंगर (शुद्ध शाकाहारी) की व्यवस्था की गई, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने सहभागिता की। एक साथ बैठकर भोजन ग्रहण करने का दृश्य कौमी एकता, भाईचारे और सामाजिक समरसता की प्रेरणादायक मिसाल बन गया।
उर्स मुबारक का यह आयोजन एक बार फिर यह संदेश दे गया कि प्रेम, सद्भाव और इंसानियत की राह ही समाज और राष्ट्र को मजबूत बनाने का सबसे बड़ा माध्यम है।
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ऐसे धार्मिक और सामाजिक आयोजन विभिन्न समुदायों के बीच संवाद, सहयोग और विश्वास को मजबूत करते हैं। जब लोग धर्म, जाति और क्षेत्रीय सीमाओं से ऊपर उठकर देश और समाज की खुशहाली के लिए एक साथ प्रार्थना करते हैं, तो वह सामाजिक एकता और लोकतांत्रिक मूल्यों को सशक्त बनाने का कार्य करता है।
भारत की पहचान उसकी “विविधता में एकता” की परंपरा से रही है। उर्स जैसे आयोजन इस विरासत को जीवंत बनाए रखते हैं, जहां धार्मिक आस्था के साथ-साथ मानवता, भाईचारे और राष्ट्रीय एकता का संदेश भी दिया जाता है।
विशेष रूप से ऐसे समय में, जब समाज विभिन्न चुनौतियों का सामना कर रहा हो, कौमी एकता के ये मंच लोगों को एक-दूसरे के करीब लाने और सामाजिक सौहार्द को मजबूत करने का कार्य करते हैं। रानीखेत का यह उर्स केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि साझा संस्कृति और इंसानियत की जीवंत अभिव्यक्ति बनकर सामने आया।
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