ओमान के पास अमेरिकी हमले में 3 भारतीय नाविकों की मौत, भारत ने दर्ज कराया कड़ा विरोध
नई दिल्ली/मस्कट | LokLens International Desk
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ओमान तट के निकट एक तेल टैंकर पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई है। भारत सरकार ने इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए अमेरिका के समक्ष कड़ा राजनयिक विरोध दर्ज कराया है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, अमेरिकी कार्रवाई के दौरान प्रभावित हुए टैंकर एमटी सेटेबेलो (MT Settebello) पर भारतीय चालक दल के सदस्य मौजूद थे। हमले के बाद लापता बताए गए तीन भारतीय नाविकों के शव बरामद कर लिए गए हैं, जबकि अन्य 21 भारतीय नाविकों को सुरक्षित निकाल लिया गया है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) का दावा है कि संबंधित जहाज कथित रूप से ईरान से जुड़े तेल परिवहन प्रतिबंधों का उल्लंघन कर रहा था और चेतावनियों की अनदेखी कर रहा था। दूसरी ओर, जहाज प्रबंधन कंपनी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग की है।
भारत ने नई दिल्ली में अमेरिकी राजनयिक को तलब कर इस घटना पर अपनी “गहरी चिंता और असंतोष” व्यक्त किया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर कार्यरत नागरिक नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए और क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज किए जाने चाहिए।
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यह घटना केवल भू-राजनीतिक तनाव की खबर नहीं है, बल्कि उन हजारों भारतीय परिवारों की चिंता से जुड़ी है, जिनके सदस्य वैश्विक व्यापारिक जहाजों पर कार्यरत हैं।
भारत दुनिया के सबसे बड़े समुद्री श्रमिक आपूर्तिकर्ताओं में से एक है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, तीन लाख से अधिक भारतीय नाविक वैश्विक समुद्री उद्योग में कार्यरत हैं। पश्चिम एशिया के संघर्ष क्षेत्रों में बढ़ते खतरे ने उनके परिवारों की चिंताओं को और बढ़ा दिया है।
ओमान के निकट हुई यह घटना कई गंभीर सवाल खड़े करती है—
- क्या व्यापारिक जहाज बढ़ते भू-राजनीतिक संघर्षों के बीच “अनचाहे शिकार” बन रहे हैं?
- अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों के तहत नागरिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी है?
- क्या पश्चिम एशिया का संकट अब वैश्विक व्यापार और समुद्री श्रमिकों के लिए नया खतरा बनता जा रहा है?
विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य विश्व ऊर्जा आपूर्ति की सबसे महत्वपूर्ण समुद्री लाइनों में से एक है। यहां बढ़ता तनाव न केवल तेल कीमतों को प्रभावित कर सकता है, बल्कि हजारों नागरिक नाविकों की सुरक्षा को भी जोखिम में डाल सकता है।
भारत के लिए चुनौती
भारत की ऊर्जा जरूरतों और वैश्विक समुद्री क्षेत्र में भारतीय नाविकों की बड़ी मौजूदगी को देखते हुए, यह घटना भारत के लिए केवल विदेश नीति का मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हित और नागरिक सुरक्षा का विषय बन गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को संघर्ष क्षेत्रों में कार्यरत अपने समुद्री कर्मियों की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक सक्रिय भूमिका निभानी पड़ सकती है।
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