सड़क पर चलती बसें कितनी सुरक्षित हैं? फिटनेस, ब्रेक और ड्राइवर ड्यूटी पर देशभर में सघन जांच
राष्ट्रीय | परिवहन सुरक्षा
Loklens News | नई दिल्ली
देश में सार्वजनिक परिवहन की सुरक्षा को लेकर आज व्यापक स्तर पर समीक्षा और निरीक्षण अभियान तेज किया गया। इस अभियान का उद्देश्य बसों की फिटनेस, ब्रेक सिस्टम, टायर स्थिति, आपात उपकरणों और ड्राइवरों की ड्यूटी-घंटों की अनुपालना की वास्तविक स्थिति का आकलन करना रहा, ताकि यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े जोखिमों को समय रहते कम किया जा सके।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, परिवहन विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अंतरराज्यीय और शहरी मार्गों पर चलने वाली बसों की रैंडम और लक्षित जांच करें। जांच में यह देखा जा रहा है कि वाहनों के फिटनेस प्रमाणपत्र वैध हैं या नहीं, ब्रेक और स्टीयरिंग सिस्टम मानकों के अनुरूप हैं या नहीं, तथा बसों में फायर एक्सटिंग्विशर, इमरजेंसी हैमर और फर्स्ट-एड जैसी अनिवार्य सुविधाएं मौजूद हैं या नहीं।
समीक्षा के दौरान ड्राइवरों की कार्य-शिफ्ट और विश्राम नियमों पर भी विशेष ध्यान दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि लंबे समय तक बिना विश्राम ड्राइविंग करने से दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ता है। इसलिए ड्यूटी-घंटों के रिकॉर्ड, अल्कोहल टेस्टिंग और ड्राइविंग व्यवहार की निगरानी को सख्त किया जा रहा है। नियमों के उल्लंघन पर चालान, परमिट निलंबन और फिटनेस रद्द जैसी कार्रवाई के प्रावधानों की याद दिलाई गई है।
इसके साथ ही, डिपो-स्तर पर रखरखाव की प्रक्रिया की समीक्षा की गई—जिसमें नियमित सर्विस शेड्यूल, स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता और मैकेनिक प्रशिक्षण शामिल है। अधिकारियों ने संकेत दिए कि जहां-जहां निरीक्षण में कमियां मिलेंगी, वहां तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे और दोबारा निरीक्षण किया जाएगा।
अभियान का एक महत्वपूर्ण पहलू यात्री शिकायत तंत्र को सक्रिय बनाना भी है। यात्रियों से अपील की गई है कि वे ओवरस्पीडिंग, खराब हालत की बस, या सुरक्षा उपकरणों की कमी जैसी शिकायतें दर्ज करें, ताकि ग्राउंड-लेवल फीडबैक के आधार पर कार्रवाई संभव हो सके।
