धामी: बजट 2026–27 से उत्तराखंड विकास की रफ्तार बढ़ेगी
LOKLENS NEWS |उत्तराखंड|
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami ने केंद्र सरकार के 2026–27 के केंद्रीय बजट को राज्य के लिए “विकास की नई रफ्तार” बताते हुए कहा है कि यह बजट उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्यों की जरूरतों, संभावनाओं और भविष्य की दिशा को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। धामी का मानना है कि यह बजट केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों के लिए एक ऐसी आर्थिक रूपरेखा है जो राज्य की पर्यटन अर्थव्यवस्था, ग्रामीण विकास, हवाई कनेक्टिविटी, सड़क बुनियादी ढांचे, महिला सशक्तिकरण और युवाओं के लिए रोज़गार को मजबूत आधार देती है। बजट में घोषित नीतियाँ सीधे तौर पर उत्तराखंड के भूगोल, जनजीवन और आर्थिक संरचना से जुड़ी हैं, जिससे राज्य को आने वाले समय में व्यापक लाभ मिलने की उम्मीद है। धामी ने विशेष रूप से इसका उल्लेख किया कि पहाड़ी राज्यों की सबसे बड़ी जरूरत— मजबूत परिवहन व्यवस्था और कनेक्टिविटी—को बजट में प्राथमिकता दी गई है, जिससे आने वाले समय में चारधाम यात्रा, एडवेंचर पर्यटन, हिमालयी इको-टूरिज़्म और स्थानीय व्यापार का दायरा बढ़ेगा।
उन्होंने कहा कि पर्वतीय राज्यों में विकास की रफ्तार मैदानी क्षेत्र के मुकाबले अलग ढंग से काम करती है। यहां सड़क निर्माण, पुल, सुरंगें, एरपोर्ट रनवे, हेलिपैड नेटवर्क और मौसम आधारित यात्रा नियंत्रण जैसी जटिल चुनौतियाँ लगातार बनी रहती हैं। लेकिन बजट में जिस तरह बुनियादी ढांचे पर ऐतिहासिक पूंजीगत व्यय किया गया है—वह उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था में तेजी लाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। वित्त मंत्री द्वारा घोषित ₹12.2 लाख करोड़ के कैपिटल व्यय से पहाड़ों में सड़क, पानी, बिजली और डिजिटल कनेक्टिविटी को नई शक्ति मिलेगी।
धामी ने कहा कि बजट में पर्यटन उद्योग के लिए घोषित योजनाएँ उत्तराखंड को सीधे लाभ देंगी। भारत को वैश्विक एडवेंचर टूरिज़्म हब बनाने की घोषणा और ट्रेकिंग रूट्स, ईको-टूरिज्म ज़ोन, एडवेंचर स्पोर्ट्स सर्किट्स और सुरक्षित पर्वतीय रूट्स के निर्माण पर जोर—राज्य के युवाओं के लिए रोजगार का बड़ा अवसर है। उत्तराखंड में पहले से ही केदारकांठा, हर की दून, पिंडारी ग्लेशियर, गंगोत्री–गोमुख और फूलों की घाटी जैसे ट्रेक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय हैं। केंद्र की नई नीतियाँ अब इन रूट्स को वैश्विक आकर्षण के लिए और अधिक सुरक्षित व उन्नत बनाने में मदद करेंगी। पर्यटन बढ़ने से पहाड़ों पर होमस्टे, गाइडिंग, परिवहन, हस्तशिल्प और ग्रामीण व्यवसाय को सीधा लाभ मिलेगा।
धामी ने यह भी कहा कि बजट में कृषि एवं ग्रामीण विकास के लिए घोषित प्रावधानों से उत्तराखंड के लगभग 70% ग्रामीण परिवारों को लाभ होगा। पर्वतीय खेती पहले से ही मौसम, ढलान और सीमित संसाधनों के कारण संवेदनशील रही है, लेकिन “ग्रामीण उत्पादक संगठन (FPO)” और “हिल एग्रीकल्चर सपोर्ट स्कीम” को दिए गए नए फंड्स किसानों की आमदनी बढ़ाने में बेहद महत्वपूर्ण साबित होंगे। उन्होंने कहा कि राज्य में सेब, कीवी, राजमा, झंगोरा, मंडुआ, मसूर और पहाड़ी मसालों जैसे स्थानीय उत्पादों का मूल्य बढ़ाने और उन्हें बाजार तक पहुँचाने में यह बजट अहम भूमिका निभाएगा।
ऊर्जा क्षेत्र पर बात करते हुए धामी ने कहा कि केंद्र द्वारा ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को बढ़ावा देना उत्तराखंड जैसे राज्यों के लिए बिल्कुल नई दिशा खोलता है। पर्वतीय भूगोल और साफ़ नदियों की प्रचुरता के कारण उत्तराखंड भविष्य में स्वच्छ ऊर्जा का बड़ा केंद्र बन सकता है। इससे उद्योगों में निवेश और युवाओं के लिए टेक्नोलॉजी-बेस्ड नौकरियों के अवसर बनेंगे।
धामी ने बजट में महिलाओं के लिए घोषित योजनाओं को भी सराहा। “शे MARTS”, “जिला-स्तरीय छात्रा हॉस्टल”, और छोटे व्यवसायों को आसान ऋण उपलब्ध कराने वाली योजनाएँ उन महिलाओं और युवतियों को आगे बढ़ने का मौका देती हैं जो आर्थिक और शैक्षणिक कठिनाइयों की वजह से पीछे रह जाती थीं। उन्होंने कहा कि यह बजट महिलाओं के लिए सशक्तिकरण का वास्तविक रोडमैप है।
इसके अलावा बजट में घोषित डिजिटल इंडिया एक्सपैंशन, ग्रामीण इंटरनेट कॉरिडोर, हेल्थ-इंफ्रास्ट्रक्चर, और चिकित्सा उपकरणों पर आधारित अनुसंधान योजनाएँ उत्तराखंड को भविष्य के लिए तैयार करेंगी। पहाड़ी क्षेत्रों में टेलीमेडिसिन, मोबाइल हेल्थ यूनिट्स और डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड को बढ़ावा देने से दूर-दराज़ गांवों में रहने वाले लोगों को बड़ा लाभ होगा।
धामी ने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्र का लक्ष्य संतुलित राजकोषीय अनुशासन के साथ विकास आगे बढ़ाना है, जिससे देश और राज्य लंबे समय में स्थिर आर्थिक वृद्धि बनाए रख सकें। यह रणनीति उत्तराखंड जैसे राज्यों के लिए महत्वपूर्ण है जहां बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए केंद्रीय सहायता अपरिहार्य रहती है।
कुल मिलाकर धामी का मानना है कि 2026–27 का बजट न केवल राष्ट्रीय विकास बल्कि उत्तराखंड के भविष्य के लिए निर्णायक है। यह राज्य को पर्यटन, परिवहन, ऊर्जा, खेती, शिक्षा और डिजिटल सेवाओं के नए दौर में ले जाने की क्षमता रखता है। उन्होंने कहा कि बजट ने उत्तराखंड के लिए वह आधार तैयार कर दिया है जो आने वाले दशक में राज्य को “विकसित पर्वतीय प्रदेश” बनने की दिशा में आगे बढ़ाएगा।
