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SSJ परिसर अल्मोड़ा की समस्याओं को लेकर छात्रसंघ उपाध्यक्ष ने मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन

अल्मोड़ा | LokLens News Desk

Soban Singh Jeena University के मुख्य परिसर अल्मोड़ा की मूलभूत समस्याओं और आधुनिकीकरण की मांग को लेकर छात्रसंघ उपाध्यक्ष भूपेश सिंह गेंडा ने मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami को ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में परिसर की खराब सड़कों, रोजगारपरक पाठ्यक्रमों की कमी और डिजिटल सुविधाओं के अभाव जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया।

ज्ञापन के अनुसार विश्वविद्यालय परिसर की मुख्य और संपर्क सड़कों की स्थिति अत्यंत खराब हो चुकी है। जगह-जगह गहरे गड्ढों के कारण दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है और छात्रों को आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। छात्रसंघ की ओर से सड़कों के तत्काल डामरीकरण और मरम्मत की मांग की गई है।

इसके साथ ही छात्रों ने विश्वविद्यालय में रोजगारपरक पाठ्यक्रम शुरू करने की मांग उठाई। ज्ञापन में रक्षा अध्ययन (Defense), पर्यटन (Tourism) और आयुष (AYUSH) जैसे व्यावसायिक विषयों को शुरू करने की आवश्यकता बताई गई, ताकि क्षेत्र के युवाओं को रोजगार और आत्मनिर्भरता के बेहतर अवसर मिल सकें।

छात्रसंघ ने विश्वविद्यालय को “डिजिटल कैंपस” के रूप में विकसित करने की भी मांग की है। इसके तहत सभी परिसरों में हाई-स्पीड वाई-फाई, डिजिटल लाइब्रेरी और स्मार्ट क्लासरूम जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात कही गई है। छात्रों का कहना है कि बदलते समय में शिक्षा को तकनीक से जोड़ना बेहद जरूरी हो गया है।

ज्ञापन में कहा गया कि अल्मोड़ा स्थित यह परिसर कुमाऊं क्षेत्र की शिक्षा का प्रमुख केंद्र है और यदि इन मांगों पर शीघ्र कार्रवाई होती है, तो हजारों छात्र-छात्राओं को सीधा लाभ मिलेगा।


विश्वविद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं और आधुनिक शिक्षा संसाधनों की कमी का सीधा असर छात्रों की पढ़ाई और भविष्य पर पड़ता है। खराब सड़कें और सीमित तकनीकी सुविधाएं ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाले छात्रों के लिए अतिरिक्त चुनौतियां पैदा करती हैं। वहीं रोजगारपरक पाठ्यक्रमों की शुरुआत युवाओं के लिए नए अवसर खोल सकती है।

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उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में उच्च शिक्षा संस्थानों के सामने इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक संसाधनों की चुनौती लगातार बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विश्वविद्यालयों को डिजिटल तकनीक, कौशल आधारित शिक्षा और रोजगारपरक पाठ्यक्रमों से जोड़ा जाए, तो पलायन और बेरोजगारी जैसी समस्याओं को कम करने में मदद मिल सकती है। SSJ विश्वविद्यालय जैसे संस्थान क्षेत्रीय विकास और युवा सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं, बशर्ते बुनियादी ढांचे और शैक्षणिक सुधारों पर गंभीरता से काम किया जाए।

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