देहरादून महा-सभा में पूर्व CM हरीश रावत और पूर्व IAS विनोद प्रसाद रतूड़ी की बड़ी मुलाकात
LOKLENS NEWS |देहरादून|
देहरादून में आज आयोजित अंकिता भंडारी न्याय महा-सभा एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गई, जब पूर्व IAS अधिकारी विनोद प्रसाद रतूड़ी और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत एक ही मंच पर पहुंचे। यह मुलाकात आंदोलन से जुड़े लोगों और राज्य की राजनीति, दोनों दृष्टियों से अहम मानी जा रही है। सभा में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे, और सभी का फोकस अंकिता भंडारी मामले की निष्पक्ष व पारदर्शी जांच पर रहा। देरी होती जांच, राजनीतिक प्रभाव और मुख्य आरोपियों की जिम्मेदारी जैसे मुद्दों पर भी चर्चा रही।
सभा में विनोद प्रसाद रतूड़ी ने अपने वक्तव्य के दौरान स्पष्ट कहा कि अब इस मामले को गंभीरता से आगे बढ़ाना आवश्यक है। उन्होंने वर्तमान मुख्यमंत्री से अपील की कि वे पार्टी राजनीति से ऊपर उठकर CBI जांच को सही दिशा दें और सुनिश्चित करें कि किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति को जांच प्रक्रिया से बाहर न रखा जाए। रतूड़ी ने यह भी कहा कि उत्तराखंड के स्वाभिमान से जुड़े मामलों में देरी राज्य के लोगों के विश्वास को प्रभावित करती है। इससे पहले भी वे अंकिता भंडारी के न्याय के लिए कैंडल मार्च में शामिल रह चुके हैं और लगातार इस मुद्दे को लेकर लोगों के बीच सक्रिय हैं।
इसी दौरान सभा स्थल पर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के पहुंचने से कार्यक्रम में एक और महत्वपूर्ण क्षण देखने को मिला। रतूड़ी ने उनकी उपस्थिति में सीधे संवाद करते हुए कहा कि अब उत्तराखंड के हित से जुड़े मुद्दों पर स्पष्ट और समयबद्ध निर्णय लेने की आवश्यकता है। उन्होंने गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने के मुद्दे को भी सामने रखा और कहा कि इस दिशा में अब और प्रतीक्षा संभव नहीं है। रतूड़ी के अनुसार राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत और जनता-सुलभ बनाने के लिए राजधानी का स्थायी समाधान जरूरी है।
सभा के बीच रतूड़ी ने एक बड़ा ऐलान किया। उन्होंने घोषणा की कि वे आगामी 8 मार्च से देहरादून में अनिश्चितकालीन क्रमिक अनशन पर बैठने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह अनशन तब तक जारी रहेगा, जब तक राज्य के हित से जुड़े मुख्य मुद्दों पर ठोस निर्णय नहीं लिए जाते। अनशन का उद्देश्य सरकार का ध्यान दिलाना और जनता की मांगों को एक स्पष्ट दिशा देना है। रतूड़ी ने इस दौरान हरीश रावत से भी अनुरोध किया कि वे अनशन के दौरान एक दिन उनके साथ बैठें। इस पर हरीश रावत ने तुरंत सहमति जताते हुए कहा कि वह इस अनशन में शामिल होने के लिए तैयार हैं। उनकी यह सहमति सभा में मौजूद लोगों द्वारा सकारात्मक कदम के रूप में देखी गई।
सभा के समापन तक उपस्थित लोगों ने रतूड़ी और रावत दोनों की सहभागिता को महत्वपूर्ण माना। सभा में यह भी महसूस किया गया कि आने वाले दिनों में आंदोलन की गति बढ़ सकती है और सरकार पर दबाव भी बढ़ेगा। अंकिता भंडारी मामले की तेज़ और निष्पक्ष जांच, दोषियों की पहचान और कार्रवाई, तथा राज्य की राजधानी को लेकर चल रहे विमर्श के कारण आंदोलन क्षेत्र में और अधिक व्यापक रूप ले सकता है। देहरादून में आयोजित यह महा-सभा आने वाले राजनीतिक और सामाजिक घटनाक्रमों के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है।
