पिथौरागढ़ में सत्र के पहले दिन ही किताबें — छात्रों को मिली राहत, पढ़ाई को मिला सही शुरुआत
LOKLENS STATE REPORT|पिथौरागढ़|
पिथौरागढ़ में नए शिक्षा सत्र 2026-27 की शुरुआत एक सकारात्मक संदेश के साथ हुई, जब पीएम श्री एस.डी.एस. राजकीय विद्यालय में पहले ही दिन छात्रों को पाठ्यपुस्तकों का वितरण किया गया। आमतौर पर स्कूलों में किताबें मिलने में देरी की शिकायतें सामने आती हैं, लेकिन इस बार सत्र की शुरुआत से ही छात्रों को किताबें उपलब्ध कराकर एक बेहतर पहल देखने को मिली।
इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहे Ganesh Singh Bhandari, जिन्होंने छात्रों को पुस्तकें वितरित करते हुए कहा कि सत्र के पहले दिन ही पाठ्यपुस्तकें मिलना विद्यार्थियों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगा। उन्होंने इस पहल को शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
कार्यक्रम में भारतीय जनता पार्टी के जिला महामंत्री इंदर लंठी, मुख्य शिक्षा अधिकारी तरुण पंत, जिला शिक्षा अधिकारी हिमांशु नौगाई और पीटीए अध्यक्षा श्रीमती लीला देवी भी उपस्थित रहीं। सभी ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इससे छात्रों को पढ़ाई में निरंतरता बनाए रखने में मदद मिलेगी।
विद्यालय के प्रधानाचार्य बहादुर सिंह बिष्ट ने कार्यक्रम में आए सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए आभार व्यक्त किया और कहा कि विद्यालय लगातार छात्रों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण देने के लिए प्रयासरत है। कार्यक्रम का संचालन गोकेश पंत द्वारा किया गया, जिसमें विद्यालय के सभी शिक्षक-शिक्षिकाएं भी उपस्थित रहीं।
अगर इस पूरे आयोजन को गहराई से समझें, तो यह सिर्फ एक पुस्तक वितरण कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह उस बदलाव का संकेत है जहां शिक्षा व्यवस्था में समय पर संसाधन उपलब्ध कराने पर ध्यान दिया जा रहा है। अक्सर देखा गया है कि किताबें देर से मिलने के कारण छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होती है और शुरुआती महीनों में उनका सीखने का क्रम टूट जाता है।
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इस पहल का सबसे बड़ा असर छात्रों पर पड़ेगा। जब उन्हें सत्र के पहले दिन ही किताबें मिल जाती हैं, तो वे बिना किसी देरी के पढ़ाई शुरू कर सकते हैं, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और सीखने की गति भी बेहतर होती है। खासकर ग्रामीण और सरकारी स्कूलों के बच्चों के लिए यह और भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि उनके पास वैकल्पिक संसाधन सीमित होते हैं।
यह कदम यह भी दिखाता है कि अगर प्रशासन और शिक्षा विभाग समय पर योजना बनाकर काम करें, तो शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार संभव है। यह एक छोटा लेकिन प्रभावशाली बदलाव है, जो लंबे समय में छात्रों के भविष्य को बेहतर बना सकता है।
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