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अग्निवीर भर्ती और विश्वविद्यालय परीक्षा टकराने पर ABVP का प्रदर्शन

अल्मोड़ा | LokLens News Desk

Akhil Bharatiya Vidyarthi Parishad (ABVP) की अल्मोड़ा इकाई द्वारा अग्निवीर भर्ती परीक्षा और विश्वविद्यालय परीक्षाओं की तिथियां एक साथ निर्धारित होने के विरोध में विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष धरना-प्रदर्शन किया गया। परिषद कार्यकर्ताओं ने कहा कि इस स्थिति के कारण अनेक छात्र गंभीर दुविधा का सामना कर रहे हैं।

विद्यार्थी परिषद के अनुसार कई छात्रों की अग्निवीर भर्ती परीक्षा और विश्वविद्यालय की सेमेस्टर/परिसर परीक्षाएं एक ही समय पर निर्धारित हो गई हैं। इससे छात्रों के सामने एक ओर शैक्षणिक भविष्य और दूसरी ओर देश सेवा से जुड़े भर्ती अवसर के बीच चयन करने की मजबूरी पैदा हो रही है।

ABVP कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की कि अग्निवीर भर्ती परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों को विशेष अवकाश, वैकल्पिक परीक्षा अथवा पुनर्परीक्षा जैसी सुविधा प्रदान की जाए, ताकि किसी भी विद्यार्थी को अपने करियर और भविष्य के साथ समझौता न करना पड़े।

परिषद नेताओं ने कहा कि छात्रों के हितों की रक्षा करना विश्वविद्यालय प्रशासन की जिम्मेदारी है और इस विषय पर जल्द सकारात्मक निर्णय लिया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि छात्रों की इस मांग पर उचित कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन चरणबद्ध आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होगा।

प्रदर्शन के दौरान नगर मंत्री रोहित कुमल्टा, दीपक लोहनी, दीपक राठौर, नीरज टाकूली, प्रवीण, मनीष पखलियाल, निखिल उप्रेती, सुमित जोशी, मनीष सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।


यह मुद्दा सीधे उन छात्रों से जुड़ा है जो उच्च शिक्षा के साथ-साथ सेना में भर्ती होकर देश सेवा का सपना भी देखते हैं। परीक्षा तिथियों के टकराव के कारण कई विद्यार्थियों को मानसिक दबाव और अनिश्चितता का सामना करना पड़ सकता है। यदि वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई तो कुछ छात्रों का शैक्षणिक या रोजगार संबंधी अवसर प्रभावित हो सकता है।

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उत्तराखंड जैसे राज्यों में बड़ी संख्या में युवा सेना और सुरक्षा बलों में भर्ती होने की तैयारी करते हैं। वहीं विश्वविद्यालय परीक्षाएं भी उनके शैक्षणिक भविष्य के लिए महत्वपूर्ण होती हैं। ऐसे मामलों में परीक्षा कैलेंडर के बेहतर समन्वय और छात्र हितों को ध्यान में रखते हुए विशेष व्यवस्था की आवश्यकता महसूस की जाती है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भर्ती परीक्षाओं और विश्वविद्यालय परीक्षाओं के बीच समन्वय स्थापित कर छात्रों को अनावश्यक तनाव और अवसरों के नुकसान से बचाया जा सकता है।

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