सिर्फ कोहरा नहीं, सांसों पर भी असर… क्या उत्तर भारत की हवा एक नई चुनौती बन रही है?
राष्ट्रीय | पर्यावरण
Loklens News | नई दिल्ली
उत्तर भारत के कई बड़े शहरों में सर्दियों के साथ-साथ वायु प्रदूषण की स्थिति भी गंभीर बनी हुई है। घने कोहरे और स्थिर मौसम परिस्थितियों के कारण हवा में प्रदूषक तत्व लंबे समय तक टिके हुए हैं, जिससे वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) कई क्षेत्रों में खराब से बहुत खराब श्रेणी में दर्ज किया गया है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार दिल्ली-एनसीआर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा के कुछ हिस्सों में पीएम2.5 और पीएम10 का स्तर निर्धारित मानकों से ऊपर रहा। सुबह और रात के समय हवा में नमी अधिक होने से प्रदूषण का प्रभाव और बढ़ गया।
विशेषज्ञों के अनुसार सर्दियों में कम हवा की गति, वाहनों का उत्सर्जन, औद्योगिक गतिविधियां और खुले में जलने वाले ईंधन प्रदूषण को बढ़ाते हैं। इसके साथ ही कोहरे की परत प्रदूषक कणों को वातावरण में फंसा देती है, जिससे सांस लेने में दिक्कत बढ़ जाती है।
स्वास्थ्य विभाग ने बच्चों, बुजुर्गों और सांस की बीमारी से ग्रसित लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। सुबह की सैर सीमित रखने, मास्क का उपयोग करने और अत्यधिक प्रदूषित क्षेत्रों से बचने की अपील की गई है। कुछ शहरों में प्रशासन द्वारा वायु गुणवत्ता पर निगरानी बढ़ाई गई है।
मौसम विभाग का अनुमान है कि हवाओं की गति बढ़ने या बारिश होने पर प्रदूषण में कुछ हद तक राहत मिल सकती है, लेकिन फिलहाल आने वाले दिनों में स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखने की आवश्यकता है।
