प्रदेश

मानव-वन्यजीव संघर्ष पर उत्तराखंड सरकार की चिंता, रोकथाम के उपायों पर मंथन

LokLens News |

देहरादून।
उत्तराखंड में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष को लेकर राज्य सरकार और वन विभाग के स्तर पर चिंता गहराती जा रही है। पर्वतीय और वन सीमावर्ती क्षेत्रों में तेंदुए और भालू के हमलों की घटनाओं में हाल के महीनों में वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे ग्रामीण इलाकों में भय और असुरक्षा का वातावरण बना हुआ है।

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, राज्य के कई जिलों में वन क्षेत्र मानव बस्तियों के निकट स्थित हैं। जंगलों से सटे गांवों में मवेशियों पर हमले, फसलों को नुकसान और कभी-कभी मानव पर हमले जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं। इन परिस्थितियों ने ग्रामीण जीवन और दैनिक गतिविधियों को प्रभावित किया है।

वन विभाग द्वारा संघर्ष की घटनाओं को नियंत्रित करने के लिए प्रभावित क्षेत्रों में गश्त बढ़ाई जा रही है। साथ ही संवेदनशील इलाकों में निगरानी दलों की तैनाती की गई है, ताकि वन्यजीवों की गतिविधियों पर समय रहते नजर रखी जा सके। ग्रामीणों को सतर्क करने के लिए जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं, जिनमें रात के समय अकेले बाहर न निकलने, जंगल के किनारे सतर्कता बरतने और आपात स्थिति में विभाग को सूचित करने जैसे सुझाव दिए जा रहे हैं।

राज्य स्तर पर मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति की समीक्षा उत्तराखंड राज्य वन्यजीव बोर्ड की बैठकों में भी की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों की पहचान कर वहां दीर्घकालिक समाधान की दिशा में कदम उठाने पर विचार किया जा रहा है। इसमें वन्यजीवों की आवाजाही के मार्गों का अध्ययन, वन क्षेत्रों में भोजन और जल स्रोतों की उपलब्धता तथा मानवीय गतिविधियों के प्रभाव का आकलन शामिल है।

वन विभाग का कहना है कि संघर्ष की घटनाओं को कम करने के लिए तकनीकी उपायों पर भी विचार किया जा रहा है। कुछ क्षेत्रों में निगरानी कैमरे, अलर्ट सिस्टम और स्थानीय स्तर पर त्वरित सूचना तंत्र को मजबूत किया जा रहा है, ताकि किसी भी घटना की सूचना तुरंत संबंधित विभाग तक पहुंच सके।

अधिकारियों के अनुसार, मानव-वन्यजीव संघर्ष एक जटिल समस्या है, जिसके समाधान के लिए वन संरक्षण, ग्रामीण सुरक्षा और पर्यावरण संतुलन—तीनों पहलुओं को साथ लेकर चलना आवश्यक है। फिलहाल विभाग द्वारा स्थिति पर निरंतर नजर रखी जा रही है और आवश्यकतानुसार आगे के कदम तय किए जाएंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *