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नंदा देवी राज जात यात्रा: पहले 2027 के लिए टली थी, अब महापंचायत ने 2026 में आयोजन का सर्वसम्मति से लिया निर्णय

चमोली | LokLens News |

उत्तराखंड की ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान मानी जाने वाली नंदा देवी राज जात यात्रा को लेकर एक बार फिर महत्वपूर्ण निर्णय सामने आया है। चमोली जनपद के नंदानगर में आयोजित महापंचायत में सर्वसम्मति से यह तय किया गया कि यह यात्रा वर्ष 2026 में ही आयोजित की जाएगी

इस निर्णय के साथ ही यात्रा की तिथि को लेकर बीते समय से बनी असमंजस की स्थिति स्पष्ट हो गई है।

महापंचायत में धर्माचार्य, तीर्थ पुरोहित, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। बैठक में यात्रा की परंपराओं, मार्ग, सुरक्षा, मौसम की स्थिति और प्रशासनिक तैयारियों पर विस्तृत चर्चा की गई।

पहले 2027 के लिए टाली गई थी यात्रा

गौरतलब है कि इससे पूर्व नंदा देवी राजजात समिति द्वारा यात्रा को 2026 से टालकर 2027 में आयोजित करने का निर्णय लिया गया था। समिति ने उस समय हिमालयी क्षेत्रों में संभावित भूस्खलन, हिमस्खलन और मौसम संबंधी जोखिमों को प्रमुख कारण बताया था। साथ ही यह भी कहा गया था कि यात्रा को उसके पारंपरिक 12 वर्षीय चक्र के अनुसार 2027 में ही आयोजित किया जाना उपयुक्त रहेगा।

हालांकि इस निर्णय के बाद स्थानीय समुदायों और धार्मिक संगठनों के बीच यात्रा की तिथि को लेकर लगातार संवाद चलता रहा।

महापंचायत में बदला निर्णय

नंदानगर में आयोजित महापंचायत में सभी पक्षों की राय सुनने के बाद यह निष्कर्ष निकाला गया कि यदि समय रहते तैयारियां शुरू की जाएं तो यात्रा को 2026 में सुरक्षित और परंपरागत तरीके से संपन्न कराया जा सकता है। इसी के आधार पर यात्रा को 2026 में आयोजित करने पर सहमति बनी।

महापंचायत में यह भी तय किया गया कि यात्रा से जुड़े सभी पारंपरिक अनुष्ठान, पूजा-पद्धति, डोली यात्रा और धार्मिक नियमों का पूर्ण पालन किया जाएगा।

यात्रा मार्ग और व्यवस्थाओं पर चर्चा

बैठक में यात्रा के पारंपरिक मार्ग—चमोली जनपद से प्रारंभ होकर लाता, लूसिंग, सीमी, वेदनी बुग्याल, रूपकुंड होते हुए होमकुंड तक जाने वाले लगभग 280 किलोमीटर लंबे पैदल मार्ग—की स्थिति पर भी चर्चा की गई। मार्ग की मरम्मत, पड़ाव स्थलों, स्वास्थ्य सुविधाओं, सुरक्षा प्रबंध और आपदा प्रबंधन को लेकर सुझाव रखे गए।

वसंत पंचमी पर होगी मनौती

महापंचायत में यह भी स्पष्ट किया गया कि यात्रा से पूर्व वसंत पंचमी के अवसर पर परंपरागत मनौती और पूजा संपन्न की जाएगी। इसके बाद यात्रा की तिथियों और विस्तृत कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा की जाएगी।

सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व

नंदा देवी राज जात यात्रा को हिमालय की सबसे कठिन और पवित्र यात्राओं में से एक माना जाता है। यह यात्रा देवी नंदा को उनके मायके से ससुराल (होमकुंड) भेजने की प्रतीकात्मक परंपरा से जुड़ी है। तीन सप्ताह तक चलने वाली इस यात्रा में हजारों श्रद्धालु, साधु-संत और स्थानीय लोग भाग लेते हैं।

महापंचायत के निर्णय के बाद अब प्रशासनिक और सामाजिक स्तर पर तैयारियों की प्रक्रिया तेज होने की संभावना है।

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