दुनिया की राजनीति इस समय ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां हर बड़ी शक्ति अपने प्रभाव और सुरक्षा को लेकर नई रणनीतियां बना रही है। ऐसे माहौल में चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping और रूस के राष्ट्रपति Vladimir Putin की हालिया मुलाकात केवल एक सामान्य कूटनीतिक बैठक नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे बदलती वैश्विक शक्ति संरचना का बड़ा संकेत माना जा रहा है।
यह मुलाकात ऐसे समय हुई जब दुनिया पहले से ही यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया संघर्ष, ऊर्जा संकट और अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा जैसी घटनाओं से अस्थिर बनी हुई है। खास बात यह भी रही कि यह बैठक अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की चीन यात्रा के तुरंत बाद हुई, जिससे वैश्विक राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं और तेज हो गईं।
बैठक के दौरान शी जिनपिंग ने कहा कि दुनिया “जंगल के कानून” की ओर बढ़ने का खतरा झेल रही है। यह बयान केवल प्रतीकात्मक नहीं था। इसका सीधा संकेत वैश्विक शक्ति संघर्ष और बढ़ते सैन्य तनाव की ओर माना जा रहा है। चीन और रूस दोनों लंबे समय से अमेरिका के वैश्विक प्रभाव को चुनौती देने की कोशिश कर रहे हैं। दोनों देशों का मानना है कि दुनिया अब केवल एक शक्ति केंद्र पर आधारित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि बहुध्रुवीय (Multipolar) व्यवस्था की ओर बढ़नी चाहिए।
चीन और रूस की बढ़ती नजदीकी का मतलब क्या है?
पिछले कुछ वर्षों में चीन और रूस के संबंध केवल व्यापार या कूटनीति तक सीमित नहीं रहे हैं। दोनों देशों ने रक्षा, ऊर्जा, तकनीक और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एक-दूसरे का समर्थन लगातार बढ़ाया है। यूक्रेन युद्ध के बाद जब पश्चिमी देशों ने रूस पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए, तब चीन रूस के लिए सबसे बड़ा आर्थिक और रणनीतिक सहारा बनकर उभरा।
रूस के लिए चीन एक विशाल बाजार और आर्थिक सहयोगी है, जबकि चीन रूस को ऊर्जा और सैन्य सहयोग के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण मानता है। यही कारण है कि दोनों देशों के बीच तेल, गैस और व्यापार समझौतों पर लगातार बातचीत हो रही है। हालांकि इस बार भी प्रस्तावित गैस डील पर अंतिम सहमति नहीं बन पाई, जो यह दर्शाती है कि साझेदारी मजबूत होने के बावजूद दोनों देशों के अपने आर्थिक हित अलग-अलग हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन और रूस की यह नजदीकी केवल अमेरिका विरोध तक सीमित नहीं है। दोनों देश वैश्विक संस्थाओं और अंतरराष्ट्रीय नियमों में भी अपने प्रभाव को बढ़ाना चाहते हैं। BRICS और Shanghai Cooperation Organisation जैसे मंचों पर दोनों देशों की सक्रियता लगातार बढ़ रही है।
क्या दुनिया नए Cold War की ओर बढ़ रही है?
राजनीतिक विश्लेषकों के बीच अब यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या दुनिया फिर से “Cold War” जैसी स्थिति में प्रवेश कर रही है। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार मुकाबला केवल अमेरिका और रूस के बीच नहीं, बल्कि अमेरिका, चीन और रूस जैसे कई बड़े शक्ति केंद्रों के बीच दिखाई दे रहा है।
अमेरिका लगातार चीन के बढ़ते आर्थिक और सैन्य प्रभाव को अपनी वैश्विक स्थिति के लिए चुनौती मान रहा है। दक्षिण चीन सागर, ताइवान और तकनीकी प्रतिस्पर्धा जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। वहीं रूस और पश्चिमी देशों के बीच यूक्रेन युद्ध ने पहले से ही गहरी दूरी पैदा कर दी है।
ऐसे माहौल में चीन और रूस की बढ़ती रणनीतिक साझेदारी पश्चिमी देशों के लिए चिंता का विषय बन रही है। कई विशेषज्ञ मानते हैं कि दुनिया अब दो या तीन बड़े शक्ति समूहों में बंटती दिखाई दे रही है, जहां आर्थिक, तकनीकी और सैन्य प्रतिस्पर्धा आने वाले वर्षों में और तेज हो सकती है।
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