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सोशल मीडिया पर बढ़ती कार्रवाई: ‘Molitics’ और 4PM News पेज ब्लॉक, अभिव्यक्ति की आज़ादी पर सवाल

LOKLENS NATIONAL REPORT

भारत में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एक नई बहस तेज हो गई है, जहां “Molitics” जैसे सोशल मीडिया पेज को भारत में ब्लॉक कर दिया गया है। सामने आए स्क्रीनशॉट के अनुसार यह कार्रवाई सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 79(3)(b) के तहत सरकार या कानून प्रवर्तन एजेंसियों के नोटिस के आधार पर की गई है, जिसके तहत प्लेटफॉर्म को कंटेंट हटाने या ब्लॉक करने का निर्देश दिया जाता है।

इस मामले को लेकर चर्चा इसलिए और तेज हो गई है क्योंकि यह पेज राजनीतिक विश्लेषण और आम लोगों की आवाज उठाने के लिए जाना जाता था। इसके साथ ही “4PM News” जैसे अन्य डिजिटल मीडिया पेजों पर भी कार्रवाई की खबरों ने इस मुद्दे को और संवेदनशील बना दिया है।

आलोचकों का कहना है कि ऐसे प्लेटफॉर्म आम जनता के लिए एक वैकल्पिक मीडिया बन चुके हैं, जहां वे अपनी बात खुलकर रख सकते हैं। ऐसे में इन पेजों का ब्लॉक होना केवल एक तकनीकी कार्रवाई नहीं, बल्कि अभिव्यक्ति की आज़ादी पर असर के रूप में देखा जा रहा है। उनका मानना है कि यदि राजनीतिक टिप्पणी करने वाले प्लेटफॉर्म्स को इस तरह बंद किया जाता है, तो आम नागरिकों के लिए अपनी राय रखना और सरकार की आलोचना करना कठिन हो सकता है।

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वहीं, सरकार का पक्ष आमतौर पर यह होता है कि इस तरह की कार्रवाई कानून व्यवस्था बनाए रखने, फेक न्यूज़ को रोकने और गलत या भ्रामक जानकारी के प्रसार को नियंत्रित करने के लिए जरूरी होती है। सूचना प्रौद्योगिकी कानून के तहत सरकार को यह अधिकार दिया गया है कि वह ऐसे कंटेंट के खिलाफ कदम उठाए जो कानून के खिलाफ हो या सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित कर सकता हो।

अगर इस पूरे मामले को गहराई से समझें, तो यह “Regulation vs Freedom” की बहस का हिस्सा बन चुका है। एक तरफ डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को नियंत्रित करने की जरूरत है, वहीं दूसरी तरफ यह भी जरूरी है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और स्वतंत्र पत्रकारिता सुरक्षित रहे।

यह मुद्दा केवल मीडिया संस्थानों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन लाखों लोगों से जुड़ा है जो सोशल मीडिया को अपनी आवाज और रोजगार का माध्यम बना चुके हैं। अगर इस तरह की कार्रवाई बढ़ती है, तो इसका असर डिजिटल इकोनॉमी और स्वतंत्र कंटेंट क्रिएशन पर भी पड़ सकता है।

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