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SIR विवाद के बीच चुनाव आयोग की बैठक, सभी प्रमुख फैसलों को सर्वसम्मति से मंजूरी का दावा

📅 27 Sep 2026 👤 Loklens News Team 📁 देश
SIR विवाद के बीच चुनाव आयोग की बैठक, सभी प्रमुख फैसलों को सर्वसम्मति से मंजूरी का दावा

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू व विवेक जोशी की बैठक के बाद आयोग ने कहा कि SIR से जुड़े प्रमुख फैसले तीनों आयुक्तों की सर्वसम्मत मंजूरी से लिए गए। आयोग ने नोटिस प्रक्रिया में राहत और दिल्ली-महाराष्ट्र में दावे-आपत्तियों की समयसीमा बढ़ाने का भी ऐलान किया।

नई दिल्ली, 27 सितंबर 2026। मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर जारी विवाद के बीच 26 सितंबर को निर्वाचन आयोग की पूर्ण बैठक हुई। बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू व विवेक जोशी शामिल हुए। बैठक के बाद आयोग ने कहा कि SIR से जुड़े प्रमुख फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मत मंजूरी से लिए गए हैं।

विवाद की पृष्ठभूमि: The Indian Express की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि संधू और जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। इनमें मतदाता नाम जोड़ने-हटाने, Form-6 और चुनावी डेटा से जुड़े मुद्दे शामिल बताए गए। आयोग ने हालांकि कहा है कि अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।

आयोग ने दी सफाई: आयोग के अनुसार 24 जून 2025 को जारी राष्ट्रव्यापी SIR आदेश को तीनों आयुक्तों की मंजूरी प्राप्त थी। आयोग ने यह भी कहा कि इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2026 को बरकरार रखा था। SIR के अलग-अलग चरणों के कार्यक्रमों को भी आयोग ने सर्वसम्मत मंजूरी वाला बताया है।

नोटिस प्रक्रिया में बदलाव: SIR के दौरान जिन मतदाताओं को रिकॉर्ड में मेल न खाने या अन्य विसंगतियों के कारण नोटिस मिला है, उन्हें सामान्य परिस्थितियों में ERO/AERO कार्यालय जाकर व्यक्तिगत सुनवाई के लिए उपस्थित नहीं होना पड़ेगा। BLO उनके घर जाकर जरूरी दस्तावेज जुटाकर आगे की प्रक्रिया में मदद करेंगे। व्यक्तिगत सुनवाई केवल असाधारण मामलों में की जाएगी।

दिल्ली और महाराष्ट्र में समयसीमा बढ़ी: आयोग ने दिल्ली में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख 30 अक्टूबर 2026 और उनके निपटारे की तारीख 30 नवंबर की है। महाराष्ट्र में यह समयसीमा क्रमशः 12 अक्टूबर और 10 नवंबर की गई है।

Form-6 पर भी स्पष्टीकरण: आयोग ने SIR के दौरान इस्तेमाल होने वाले Form-6 में किए गए बदलावों को लेकर भी सफाई दी है। आयोग के अनुसार SIR अवधि के दौरान संबंधित घोषणा में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का संदर्भ है, जबकि सामान्य अवधि में Registration of Electors Rules, 1960 के तहत निर्धारित फॉर्म इस्तेमाल होंगे।

आंतरिक कामकाज में बदलाव: आयोग ने भविष्य की बैठकों का एजेंडा पहले साझा करने और बैठक के मिनट्स तैयार करने का फैसला किया है। IT मॉड्यूल और पोर्टल से जुड़े नए प्रस्तावों की समीक्षा के लिए अधिकारियों की समिति और स्वतंत्र IIT/IIIT विशेषज्ञ की मदद से ECINet की समीक्षा का भी निर्णय लिया गया है।

क्या आयोग में मतभेद थे? एक तरफ प्रकाशित रिपोर्टों में दो चुनाव आयुक्तों की ओर से लिखित आपत्तियों का दावा सामने आया है, वहीं आयोग का आधिकारिक पक्ष है कि अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए। ऐसे में दोनों बातों को अलग-अलग संदर्भ में देखना जरूरी है और उपलब्ध जानकारी के आधार पर किसी एक पक्ष को अंतिम निष्कर्ष मानना उचित नहीं होगा।

SIR का सीधा संबंध मतदाता सूची के पुनरीक्षण से है। ऐसी प्रक्रिया में रिकॉर्ड की जांच के साथ यह सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण है कि पात्र मतदाताओं के नाम गलती से सूची से बाहर न हों। दावे, आपत्तियों, सुनवाई और अपील की व्यवस्था इसी वजह से अहम हो जाती है।

लोकलेंस न्यूज़ विश्लेषण: SIR विवाद के बीच चुनाव आयोग ने अपने सभी प्रमुख फैसलों को सर्वसम्मत बताया है। अब प्रक्रिया में किए गए बदलावों और दावे-आपत्तियों के लिए बढ़ाई गई समयसीमा के बीच यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी और सुलभ रहती है।