नई दिल्ली, 27 सितंबर 2026। कथित म्यांमार ट्रेनिंग कैंप मामले में दिल्ली की राउज़ एवेन्यू स्थित विशेष NIA अदालत ने अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक समेत छह यूक्रेनी नागरिकों को एक महीने के लिए अपने-अपने देशों जाने की अनुमति दी है। अदालत ने परिवार से मिलने के लिए अमेरिका और यूक्रेन जाने की इजाजत दी है, लेकिन तय अवधि के बाद सभी को भारत लौटना होगा।
विशेष NIA जज प्रशांत शर्मा ने 24 सितंबर को आदेश पारित किया। अदालत ने सातों के पासपोर्ट जारी करने की अनुमति भी दी। आदेश में कहा गया कि विदेश यात्रा का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार से जुड़ा है, लेकिन इसे चल रही जांच के साथ संतुलित करना जरूरी है।
कौन हैं सात आरोपी? मामले में मैथ्यू आरोन वैनडाइक के साथ यूक्रेन के पेट्रो हुरबा, तारास स्लिविएक, इवान सुकमानोव्स्की, मारियान स्टेफानकिव, मैक्सिम होंचारुक और विक्टर कामिंस्की को मार्च 2026 में गिरफ्तार किया गया था।
NIA का आरोप है कि ये लोग म्यांमार गए थे और वहां जातीय सशस्त्र समूहों से जुड़े कथित ड्रोन-वारफेयर प्रशिक्षण में शामिल हुए। जांच में ड्रोन संचालन, असेंबली, जामिंग तकनीक और भारत के रास्ते ड्रोन उपकरणों की आवाजाही से जुड़े पहलुओं को भी शामिल किया गया है। इन आरोपों पर अभी अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं आया है।
NIA की जांच जारी: NIA ने 8 सितंबर को दाखिल पहली चार्जशीट में Immigration and Foreigners Act, 2025 की धाराओं 21 और 23 के तहत आरोप लगाए हैं। मामले में पहले UAPA की धारा 18 के तहत भी केस दर्ज किया गया था। NIA ने अदालत को बताया कि UAPA से जुड़े पहलुओं की जांच अभी जारी है और जरूरत पड़ने पर आगे पूरक चार्जशीट दाखिल की जा सकती है।
डिफॉल्ट बेल के बाद विदेश जाने की अनुमति: मैथ्यू वैनडाइक को 18 सितंबर को विशेष NIA अदालत से डिफॉल्ट बेल मिली थी। इसके बाद छह यूक्रेनी नागरिकों को भी डिफॉल्ट बेल दी गई। अदालत ने विदेश जाने की अनुमति देते हुए जांच में सहयोग की शर्तें भी बरकरार रखी हैं।
एक महीने बाद भारत लौटना होगा: अदालत के आदेश के अनुसार सातों को अपने संबंधित देशों में केवल एक महीने तक रहने की अनुमति है। उन्हें विदेश में अपने पते और संपर्क की जानकारी जांच एजेंसी को देनी होगी। NIA की ओर से जांच के दौरान बुलाए जाने पर उन्हें पेश होना होगा।
मामला क्यों महत्वपूर्ण है? जांच में म्यांमार में कथित ड्रोन-वारफेयर प्रशिक्षण और भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र के रास्ते सीमा पार गतिविधियों से जुड़े आरोपों की पड़ताल की जा रही है। NIA के अनुसार आरोपियों के मिजोरम के रास्ते म्यांमार जाने और वहां ड्रोन संचालन से जुड़े प्रशिक्षण में शामिल होने की बात सामने आई है। हालांकि, इन आरोपों पर जांच जारी है और अदालत की ओर से अंतिम दोषसिद्धि नहीं हुई है।
फिलहाल अदालत ने सातों को सीमित अवधि के लिए विदेश जाने की अनुमति दी है। उन्हें भारत लौटकर जांच में सहयोग करना होगा। विदेश यात्रा की अनुमति को मामले में आरोपों के अंतिम निपटारे के रूप में नहीं देखा जा सकता। आगे की जांच और न्यायिक कार्यवाही के आधार पर मामले का कानूनी निष्कर्ष तय होगा।