क्वारब डेंजर जोन: बार-बार बंद होती सड़क, करोड़ों का खर्च और अब भी अधूरा समाधान
अल्मोड़ा | विशेष रिपोर्ट
Loklens News | अल्मोड़ा
अल्मोड़ा-हल्द्वानी राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-109) पर स्थित क्वारब डेंजर जोन बीते कई वर्षों से उत्तराखंड की सबसे संवेदनशील और जोखिमपूर्ण सड़क स्थलों में गिना जा रहा है। यह मार्ग केवल स्थानीय आवागमन ही नहीं, बल्कि कुमाऊँ क्षेत्र को मैदानी इलाकों से जोड़ने वाला प्रमुख संपर्क रास्ता है। इसके बावजूद, यहां भूस्खलन और सड़क असुरक्षा की समस्या अब तक स्थायी रूप से हल नहीं हो पाई है।
बार-बार भूस्खलन, यातायात पर प्रतिबंध
अब तक प्रकाशित कई समाचार रिपोर्टों में यह सामने आ चुका है कि क्वारब क्षेत्र में पहाड़ी से गिरते मलबे और बड़े-बड़े बोल्डरों के कारण सड़क को कई बार पूरी तरह बंद करना पड़ा। हालात इतने गंभीर रहे कि प्रशासन को कई मौकों पर रात के समय यातायात प्रतिबंध लगाने पड़े, ताकि किसी बड़ी दुर्घटना से बचा जा सके। इसके चलते यात्रियों को वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेना पड़ा, जिससे समय, ईंधन और संसाधनों की अतिरिक्त लागत बढ़ी।
करोड़ों की लागत, फिर भी अधूरा ट्रीटमेंट
क्वारब डेंजर जोन के स्थायी उपचार के लिए करोड़ों रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई। ढलान स्थिरीकरण, सुरक्षा दीवार, ड्रेनेज सिस्टम और सड़क चौड़ीकरण जैसे कार्य प्रस्तावित किए गए। हालांकि, जमीनी स्थिति यह है कि कार्य पूरा होने के बावजूद या निर्माण के दौरान ही सुरक्षा दीवारों में दरारें सामने आईं, जिस पर कार्यदायी संस्था को नोटिस तक जारी करना पड़ा।
रिपोर्टों के अनुसार, जिस सुरक्षा दीवार से क्षेत्र को सुरक्षित करने की उम्मीद थी, वही पहली बरसात में सवालों के घेरे में आ गई। इससे निर्माण गुणवत्ता, निगरानी और तकनीकी योजना पर गंभीर प्रश्न खड़े हुए।
अगर बरसात होती है, तो खतरा क्यों बना रहता है?
स्थानीय लोगों और जानकारों का कहना है कि अगर बरसात होती है, तो क्वारब क्षेत्र में लैंडस्लाइड का खतरा फिर से बढ़ जाता है। पहाड़ी ढलान में पानी के निकास की समुचित व्यवस्था पूरी तरह कारगर नहीं हो पाई है। नालियों में मलबा भरना, ढलान का कमजोर होना और ऊपर से गिरते पत्थर सड़क को बार-बार असुरक्षित बना देते हैं।
बीते वर्षों में इस कारण एंबुलेंस, आवश्यक आपूर्ति और आपात सेवाओं को भी भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है।
विभागीय जवाबदेही पर उठते सवाल
लगातार सामने आ रही खबरों और हालातों के बीच यह सवाल बार-बार उठता है कि
- डेंजर जोन ट्रीटमेंट की मूल समयसीमा क्या थी?
- अब तक परियोजना पूरी क्यों नहीं हो पाई?
- करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद स्थायी समाधान क्यों नहीं दिख रहा?
यह भी उल्लेखनीय है कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के राज्य मंत्री स्वयं अल्मोड़ा से सांसद हैं। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर यह प्रश्न उठ रहा है कि जब केंद्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व मौजूद है, तो जिम्मेदार विभागों पर अब तक ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
जनता जवाब चाहती है
अब तक प्रकाशित खबरों और जमीनी हालातों से यह स्पष्ट है कि क्वारब डेंजर जोन केवल एक तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि जन-सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन चुका है। स्थानीय लोग, व्यापारी, वाहन चालक और यात्री यह जानना चाहते हैं कि—
- क्वारब डेंजर जोन का ट्रीटमेंट आखिर कब पूरा होगा?
- क्या इसे पूरी तरह सुरक्षित घोषित किया जा सकता है?
- अगर भविष्य में फिर सड़क बंद होती है, तो जिम्मेदारी किसकी होगी?
जब तक इन सवालों के स्पष्ट और सार्वजनिक जवाब सामने नहीं आते, तब तक क्वारब डेंजर जोन पर चल रहा काम और उस पर खर्च हुआ बजट लगातार चर्चा और जांच के दायरे में बना रहेगा।
