होमगार्ड भर्ती 2026 में आरक्षण अनियमितताओं का आरोप, युवा कांग्रेस ने मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन
LOKLENS NEWS |Almora|
होमगार्ड भर्ती 2026 में आरक्षण व्यवस्था को लेकर उत्तराखंड में राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। युवा कांग्रेस नेताओं ने भर्ती प्रक्रिया में अनुसूचित जाति वर्ग और महिला आरक्षण में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए जिला अधिकारी अल्मोड़ा के माध्यम से मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami को ज्ञापन भेजा है।
युवा कांग्रेस के जिला अध्यक्ष Vikram Singh Fartyal ने आरोप लगाया कि होमगार्ड एवं नागरिक सुरक्षा मुख्यालय, देहरादून द्वारा 28 अप्रैल 2026 को जारी 920 पदों की भर्ती विज्ञप्ति में आरक्षण के संवैधानिक प्रावधानों का सही पालन नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति वर्ग को केवल 48 पद आवंटित किए गए हैं, जबकि 19 प्रतिशत आरक्षण के अनुसार यह संख्या लगभग 175 होनी चाहिए थी।
उन्होंने यह भी कहा कि अल्मोड़ा, बागेश्वर, चंपावत, नैनीताल, पिथौरागढ़, उधमसिंह नगर, टिहरी, पौड़ी गढ़वाल और चमोली जैसे कई जिलों में अनुसूचित जाति वर्ग के लिए एक भी पद निर्धारित नहीं किया गया, जिससे भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और आरक्षण रोस्टर पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
युवा कांग्रेस नेता Gopal Bhatt ने महिला आरक्षण को लेकर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि कुल 920 पदों में महिलाओं के लिए केवल 15 पद निर्धारित किए गए हैं, जो अत्यंत कम और असंतुलित हैं। उनका कहना था कि क्षैतिज आरक्षण के तहत सभी वर्गों में महिलाओं को समान अवसर मिलना चाहिए, लेकिन इस भर्ती प्रक्रिया में इसका सही अनुपालन नहीं किया गया।
वहीं युवा कांग्रेस नेता Santosh Kumar ने कहा कि यह स्थिति अनुसूचित जाति वर्ग और महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है तथा समानता और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।
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ज्ञापन में युवा कांग्रेस ने सरकार से कई मांगें की हैं, जिनमें भर्ती प्रक्रिया की उच्च स्तरीय जांच, अनुसूचित जाति वर्ग को 19 प्रतिशत आरक्षण के अनुसार पद आवंटन, महिला आरक्षण को सभी वर्गों में क्षैतिज रूप से लागू करने और आरक्षण रोस्टर को सार्वजनिक करने की मांग शामिल है। साथ ही दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और भविष्य में ऐसी विसंगतियों को रोकने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की भी मांग की गई है।
ज्ञापन सौंपने के दौरान विक्रम सिंह फर्त्याल, संतोष कुमार, गोपाल भट्ट, राकेश कुमार, उमेश, सुनील आर्या, दिनेश सहित कई युवा कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
सरकारी भर्तियों में आरक्षण व्यवस्था केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा विषय है। ऐसे मामलों में पारदर्शिता और स्पष्टता बेहद जरूरी होती है, क्योंकि भर्ती प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की विसंगति सामाजिक असंतोष और राजनीतिक विवाद को जन्म दे सकती है। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह राज्य की भर्ती प्रणाली और आरक्षण नीति के क्रियान्वयन पर गंभीर प्रश्न खड़े करेगा।
इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा असर उन युवाओं पर पड़ता है, जो सरकारी नौकरी को अपने भविष्य और आर्थिक स्थिरता का आधार मानते हैं। अनुसूचित जाति वर्ग और महिलाओं के लिए आरक्षण केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि अवसरों में समानता सुनिश्चित करने का माध्यम है। ऐसे में यदि आरक्षण प्रक्रिया में अनियमितता की आशंका पैदा होती है, तो युवाओं में असंतोष और अविश्वास बढ़ना स्वाभाविक है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और रोस्टर की सार्वजनिक उपलब्धता विवादों को कम करने में मदद कर सकती है। साथ ही समय पर स्पष्टीकरण और निष्पक्ष जांच से सरकार पर जनता का भरोसा भी मजबूत होता है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार इस ज्ञापन और आरोपों पर क्या रुख अपनाती है और क्या भर्ती प्रक्रिया में किसी प्रकार का संशोधन या जांच की जाती है।
[गोल्ज्यू संदेश यात्रा का भव्य स्वागत, श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा और जयकारों से किया स्वागत।
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