मुख्यमंत्री धामी के अल्मोड़ा दौरे पर युवा कांग्रेस का उग्र प्रदर्शन, SSJ विश्वविद्यालय मुद्दों को लेकर काले झंडे दिखाए
अल्मोड़ा | LokLens News Desk
Pushkar Singh Dhami के अल्मोड़ा आगमन के दौरान Indian Youth Congress कार्यकर्ताओं और छात्र नेताओं ने सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय (SSJ University) में कथित अनियमितताओं, छात्र विरोधी नीतियों, प्रोफेसर भर्ती में आरक्षण रोस्टर प्रणाली को लेकर विवाद, निर्माण कार्यों में कथित घोटालों और शिक्षा व्यवस्था की स्थिति को लेकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री के खिलाफ काले झंडे दिखाते हुए नारेबाजी की।
युवा कांग्रेस नेता गोपाल भट्ट ने आरोप लगाया कि प्रदेश और देश में भर्ती घोटाले तथा पेपर लीक जैसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं और शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार बढ़ता जा रहा है। उन्होंने NEET पेपर लीक मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि छात्रों और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। उनका आरोप था कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही कमजोर होती जा रही है।
प्रदर्शनकारी गांधी पार्क चौघानपाटा से रैली निकालकर कार्यक्रम स्थल SSJ विश्वविद्यालय की ओर बढ़ने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन भारी पुलिस बल तैनात कर उन्हें रोक दिया गया। इस दौरान पुलिस और युवा कांग्रेस नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक हुई। बाद में कई युवा कांग्रेस नेताओं और छात्र नेताओं को हिरासत में लेकर थाने ले जाया गया, जिससे कार्यकर्ताओं में आक्रोश फैल गया।
प्रदर्शन के दौरान “SSJU बचाओ”, “कुलपति इस्तीफा दो”, “मुख्यमंत्री गो बैक” और “भ्रष्टाचार बंद करो” जैसे नारे लगाए गए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि विश्वविद्यालय में छात्र हितों की लगातार अनदेखी हो रही है और छात्रों की मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जा रहा।
युवा कांग्रेस जिला अध्यक्ष विक्रम सिंह फर्त्याल ने सवाल उठाया कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन पूरी तरह पारदर्शी है, तो छात्र प्रतिनिधिमंडल को मुख्यमंत्री से मिलने से क्यों रोका जा रहा है। वहीं प्रदेश महासचिव किरन आर्या ने विश्वविद्यालय की प्रशासनिक, वित्तीय और शैक्षणिक कार्यप्रणाली की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की।
प्रदर्शन में गोपाल भट्ट, किरन आर्या, विक्रम फर्त्याल, गौरव सतवाल, गौरव जोशी, कमलेश बिष्ट, विनय कनवाल, अभय बोरा, वीरेंद्र आर्य, दीक्षा सुयाल, फेमिना खान, वैभव पांडे सहित अनेक युवा कांग्रेस और छात्र नेता मौजूद रहे।
विश्वविद्यालयों में भर्ती, परीक्षा और प्रशासनिक पारदर्शिता से जुड़े मुद्दों का सीधा असर छात्रों और युवाओं के भविष्य पर पड़ता है। शिक्षा व्यवस्था में अनिश्चितता और विवाद छात्रों में तनाव और असुरक्षा की भावना बढ़ा सकते हैं। वहीं पुलिस कार्रवाई और राजनीतिक विरोध प्रदर्शन स्थानीय माहौल को भी प्रभावित करते हैं।
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उत्तराखंड सहित देश के कई हिस्सों में भर्ती परीक्षाओं, पेपर लीक और विश्वविद्यालय प्रशासन को लेकर सवाल लगातार उठते रहे हैं। शिक्षा संस्थानों में पारदर्शिता, जवाबदेही और छात्र हितों को लेकर बढ़ती राजनीतिक सक्रियता यह संकेत देती है कि युवाओं से जुड़े मुद्दे अब राजनीतिक विमर्श के केंद्र में आ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शिक्षा व्यवस्था में विश्वास कमजोर होता है, तो इसका असर केवल छात्रों के करियर पर नहीं बल्कि पूरे समाज की संस्थागत विश्वसनीयता पर पड़ता है।
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