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अल्मोड़ा नर्सिंग संस्थान विवाद: युवा कांग्रेस ने जांच की मांग उठाई, सत्ता संरक्षण के आरोप

LOKLENS NEWS|अल्मोड़ा|

अल्मोड़ा में निजी नर्सिंग संस्थानों को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इसी क्रम में 30 अप्रैल 2026 को युवा कांग्रेस अल्मोड़ा के कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी से मुलाकात कर Maa Ambe Institute of Nursing and Paramedical Sciences के खिलाफ एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा।

युवा कांग्रेस ने संस्थान पर छात्रों के शोषण, अव्यवस्था, मनमानी फीस वसूली और सत्ता के दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। संगठन ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।

ज्ञापन में सबसे गंभीर मुद्दा पत्रकारों के साथ कथित अभद्रता और धमकी का उठाया गया। युवा कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि संस्थान के संचालकों द्वारा एक वरिष्ठ पत्रकार को धमकाया गया, जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानून-व्यवस्था दोनों के लिए चिंता का विषय है।

इसके अलावा संगठन ने आरोप लगाया कि संस्थान नियमों को नजरअंदाज कर संचालित किया जा रहा है और छात्रों से मनमाने तरीके से फीस वसूली की जा रही है। युवा कांग्रेस का कहना है कि शिक्षा को व्यवसाय का रूप देकर छात्रों और उनके परिवारों पर आर्थिक दबाव डाला जा रहा है।

राजनीतिक संरक्षण का मुद्दा भी ज्ञापन में प्रमुखता से उठाया गया। युवा कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि संस्थान में भाजपा और आरएसएस से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि संस्थान को सत्ता का संरक्षण प्राप्त है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।

इस दौरान युवा कांग्रेस नेता और अधिवक्ता Gopal Bhatt ने कहा कि यदि छात्रों और पत्रकारों की मांगों पर तुरंत जांच शुरू नहीं की गई, तो युवा कांग्रेस सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करेगी। उन्होंने कहा कि पहाड़ के छात्रों का शोषण किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

कार्यक्रम में युवा कांग्रेस जिला अध्यक्ष Vikram Singh Fartyal, नगर अध्यक्ष Gaurav Joshi Shetty, जिला महासचिव प्रकाश डसिला, कमलेश बिष्ट सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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इस रिपोर्ट में शामिल आरोप युवा कांग्रेस द्वारा सौंपे गए ज्ञापन और सार्वजनिक बयानों पर आधारित हैं। संबंधित संस्थान या प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने पर रिपोर्ट को अपडेट किया जाएगा।

उत्तराखंड में निजी शिक्षा संस्थानों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन इसके साथ पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग भी बढ़ी है। जब शिक्षा व्यवस्था पर राजनीतिक संरक्षण और आर्थिक शोषण जैसे आरोप लगते हैं, तो यह केवल एक संस्थान का मामला नहीं रह जाता, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है।

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