काठमांडू, 26 सितंबर 2026। नेपाल के हिमालयी इलाकों में 26 अगस्त को आई बाढ़ के करीब एक महीने बाद पानी का स्तर कम हुआ है, लेकिन प्रभावित परिवारों के सामने संकट बना हुआ है। घरों, सड़कों, पुलों, खेतों और जरूरी सेवाओं को हुए नुकसान के बाद अब राहत से आगे पुनर्निर्माण की चुनौती है।
The Climate Economy के एक कार्यक्रम में London School of Economics and Political Science (LSE) से जुड़े Visiting Fellow डॉ. निमेश ढुंगाना के साथ पोस्ट-डिजास्टर गवर्नेंस, जवाबदेही और प्रभावित समुदायों की भूमिका पर चर्चा हुई। इसमें इस बात पर जोर दिया गया कि पुनर्निर्माण की योजना में प्रभावित लोगों की आवाज भी शामिल होनी चाहिए।
बाढ़ से भारी नुकसान: भोटे कोशी और त्रिशूली नदी तंत्र में आई बाढ़ से रासुवा, नुवाकोट और धादिंग समेत कई इलाके प्रभावित हुए। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार हजारों लोग अब भी अपने घरों से दूर हैं। सड़कों, पुलों, बिजली और संचार व्यवस्था को भी नुकसान पहुंचा है।
UNDP के प्रारंभिक आकलन के अनुसार प्रभावित 17 नगरपालिकाओं में करीब 84,270 लोग प्रभावित आबादी में शामिल हैं। करीब 5.56 लाख टन भवन संबंधी मलबे और कुल लगभग 22 लाख टन मलबे की सफाई की जरूरत का अनुमान है। ये प्रारंभिक आंकड़े हैं और अंतिम नुकसान का आकलन नहीं हैं।
अब सवाल सुरक्षित पुनर्वास का: जिन इलाकों में घर बह गए या जमीन असुरक्षित हो गई, वहां लोगों को दोबारा बसाने को लेकर चुनौती बनी हुई है। ऐसे में पुनर्निर्माण केवल मकान बनाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जमीन, आजीविका, स्कूल, स्वास्थ्य सेवाओं और भविष्य की सुरक्षा से भी जुड़ा होगा।
स्थानीय लोगों की भागीदारी जरूरी: डॉ. निमेश ढुंगाना के शोध में आपदा के बाद social accountability और समुदाय की भागीदारी पर जोर दिया गया है। उनके अनुसार स्थानीय लोगों के अनुभव और जानकारी पुनर्निर्माण की प्राथमिकताएं तय करने में उपयोगी हो सकती हैं।
हर इलाके की परिस्थितियां अलग होने के कारण एक जैसी पुनर्निर्माण नीति के बजाय स्थानीय जरूरतों के अनुसार योजना बनाने की जरूरत है। स्थानीय सरकारों की भूमिका भी इसमें महत्वपूर्ण हो सकती है।
खेती और रोजगार की बहाली भी जरूरी: FAO के प्रारंभिक आकलन के अनुसार करीब 1,800 हेक्टेयर फसल क्षेत्र प्रभावित हुआ और बड़ी संख्या में पशुधन का नुकसान हुआ। ऐसे में किसानों को बीज, पशुधन और कृषि ढांचे की सहायता के साथ छोटे कारोबारों को दोबारा शुरू करने के लिए सहयोग की जरूरत होगी।
स्वास्थ्य और मलबा प्रबंधन चुनौती: बाढ़ के बाद पानी और स्वच्छता व्यवस्था प्रभावित होने से बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है। WHO ने प्रभावित इलाकों में बीमारी की निगरानी के लिए स्वास्थ्य टीमों को सहयोग दिया है। वहीं लाखों टन मलबे को सुरक्षित तरीके से हटाना भी प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती है।
राहत से पुनर्निर्माण की ओर: नेपाल सरकार ने नुकसान और पुनर्निर्माण की जरूरतों का आकलन करने के लिए Post-Disaster Needs Assessment (PDNA) की प्रक्रिया शुरू की है। सरकार के अनुसार दीर्घकालीन पुनर्निर्माण की जरूरत अरबों डॉलर तक पहुंच सकती है।
चुनौती केवल धन जुटाने की नहीं, बल्कि उसे पारदर्शी तरीके से प्रभावित क्षेत्रों और परिवारों तक पहुंचाने की भी है। साथ ही पुनर्निर्माण में भविष्य की बाढ़, भूस्खलन और अन्य आपदा जोखिमों को ध्यान में रखना होगा।
लोकलेंस न्यूज़ विश्लेषण: नेपाल के सामने अब सवाल केवल कितना पुनर्निर्माण करना है, बल्कि सुरक्षित और जवाबदेह तरीके से कैसे करना है। प्रभावित लोगों की भागीदारी, स्थानीय प्रशासन की क्षमता, वैज्ञानिक जोखिम आकलन और पारदर्शी वित्तीय व्यवस्था को साथ लेकर चलना पुनर्निर्माण की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बना सकता है।